गुड़ उत्पाद से प्रसिद्धि कुशल मंगल जैविक कृषि फार्म ब्रांड से गन्ना पौध से लेकर जैविक खेती द्वारा गन्ने से निर्मित विभिन्न उत्पादों को देश-विदेश में बेचने वाले मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की करताज तहसील के नन्हे गांव निवासी गन्ना किसान व उद्यमी श्री राकेश दूबे अपने गुड़ उत्पाद को लेकर प्रसिद्ध हैं। श्री दुबे ने जब गन्ने की फसल पर कार्य शुरू किया तब उन्हें गन्ना खेती में पहले महीने से लेकर 15वें महीने तक जूझना पड़ता था। जैविक गुड़ इकाई जब उन्होंने अपने खेत में कार्य शुरू किया, उस समय मृदा में कार्बनिक कार्बन की मात्रा 0.23-0.27 थी। गन्ने की पूरी कीमत नहीं मिलती थी, उन्हें केवल 180-240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ने का मूल्य मिलता था। तब उन्होंने जैविक गुड़ इकाई पर काम किया। गन्ना प्रजनन संस्थान द्वारा विकसित बुआई पैकेज एवं पद्धति को अपनाया तथा अड़साली रोपण पर कार्य आरंभ किया। एकल आंख बीज प्रयोग जून में जैसे ही बीज की आवश्यकता हुई, तो गन्ने की एकल आंख का बीज प्रयोग किया और दूसरे किसानों को भी इसके लिए प्रेरित किया। गन्ने का बीज (एकल आंख) दूसरे देश जैसे-नेपाल तक पहुंचाया और बचे गन्ने से गुड़ बनाया। किस्म को.-86032 के एक क्विंटल गन्ने से 17-18 कि.ग्रा. तक गुड़ की परता प्राप्त की। श्री राकेश दुबे जी ने दूसरे देशों जैसे-दुबई, मारीशियस एवं सिंगापुर आदि में भी सुगंधित गुड़ 70-120 रुपये प्रति कि.ग्रा. की दर से बेचा। उत्तम क्वालिटी का गुड़ भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करके ये गन्ने की अच्छी पैदावार प्राप्त करने में, संस्थान की प्रजाति से उत्तम क्वालिटी का गुड़ तैयार करने में कामयाब रहे एवं ऑर्गेनिक गुड़ की ब्रांडिग एवं मार्केटिंग से अपने ब्रांड एवं क्षेत्र की पहचान देश-विदेश में बना पाने में सफल रहे। श्री राकेश दूबे आज देश के किसानों के रोल मॉडल बन कर उभरे हैं। स्त्रोत : स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), रविन्द्र कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक (पादप प्रजनन), प्रधान अन्वेषक बीज परियोजना,एम.आर. मीना गन्ना वैज्ञानिक (पादप जनन), पूजा, वैज्ञानिक (पादप कार्यिकी), एम.एल. छाबड़ा, प्रधान वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान), एस.के. पाण्डेय, प्रधान वैज्ञानिक(कीट विज्ञान), भाकृअनुस-गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय केंद्र, करनाल और बक्शी राम निदेशक, भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर